माता अनसूया, स्त्रीधर्म और श्रीराम के वनवास का सबसे पवित्र आश्रम | Mata Anasuya & Valmiki Ramayana (Part 2)
माता अनसूया, स्त्रीधर्म और श्रीराम के वनवास का सबसे पवित्र आश्रम | Mata Anasuya & Valmiki Ramayana (Part 2) ✍️ एक लेखक और चिंतक के रूप में मेरे विचार… जय श्री राम! 'राम जी के व्यक्तित्व-निर्माण की दिव्य श्रृंखला' में हमने समझा कि कैसे अयोध्या में महर्षि वशिष्ठ ने श्रीराम को राजधर्म सिखाया, वनों में महामुनि विश्वामित्र ने अस्त्र-शस्त्र व शक्ति-संतुलन का बोध कराया, और प्रयाग संगम पर महर्षि भरद्वाज के आश्रम में उन्हें रणनीतिक दृष्टि मिली। जब श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण चित्रकूट का रणनीतिक चयन करने के बाद आगे बढ़ते हुए महर्षि अत्रि के आश्रम पहुँचे, तब यह केवल एक ऋषि से भेंट नहीं थी—यह धर्म और तपस्या के दो महान प्रवाहों का संगम था। महर्षि अत्रि ने भगवान श्रीराम का अत्यंत आदरपूर्वक स्वागत किया। किंतु उसके बाद जो घटना हुई, वही भारतीय संस्कृति में इस आश्रम को अमर बना देती है। महर्षि अत्रि ने माता सीता को अपनी धर्मपत्नी— महासती माता अनसूया —के पास भेजा। 🌺 माता अनसूया कौन थीं? भारतीय संस्कृति में यदि पतिव्रता स्त्रियों की सूची बनाई जाए, तो माता अनसूया का स्थान सर्वोच्च आता है...