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महर्षि वाल्मीकि — आदि-कवि, इतिहास के साक्षात गवाह और माता सीता के परम आश्रयदाता (2)

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  maharishi-valmiki-ramayana-author-divine-art महर्षि वाल्मीकि के व्यक्तित्व को समझने के तीन महत्त्वपूर्ण दृष्टिकोण महर्षि वाल्मीकि को यदि केवल "रामायण के लेखक" मान लिया जाए, तो यह उनके व्यक्तित्व का अत्यंत सीमित परिचय होगा। वे केवल कवि नहीं थे... वे इतिहास के साक्षी थे... वे समाज के नैतिक विवेक थे... वे धर्म और करुणा के संतुलन के प्रतीक थे... और सबसे बढ़कर—वे उस युग की अंतरात्मा थे। उनके व्यक्तित्व को समझने के लिए हमें तीन अलग-अलग दृष्टिकोणों से उन्हें देखना होगा। ━━━━━━━━━━━━━━━ ① श्रीरामचरितमानस की दृष्टि से — ज्ञान, भक्ति और करुणा का अद्वितीय संगम गोस्वामी तुलसीदास जी ने महर्षि वाल्मीकि को केवल आदि-कवि नहीं माना। उन्होंने उन्हें भगवान की कथा का प्रथम दिव्य माध्यम माना है। रामचरितमानस के मंगलाचरण में तुलसीदास जी वाल्मीकि का स्मरण उसी श्रद्धा से करते हैं, जिस श्रद्धा से वे भगवान शिव, माता सरस्वती और श्रीगणेश का करते हैं। यह अपने आप में बताता है कि सनातन परम्परा में वाल्मीकि का स्थान कितना ऊँचा है। किन्तु मानस में एक अत्यंत अद्भुत प्रसंग आता है। वनवास के समय जब श्रीराम, मात...

महर्षि वाल्मीकि — आदि-कवि, इतिहास के साक्षात गवाह और माता सीता के परम आश्रयदाता

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  महर्षि वाल्मीकि — आदि-कवि, इतिहास के साक्षात गवाह और माता सीता के परम आश्रयदाता महर्षि वाल्मीकि — आदि-कवि और रघुकुल की भावी पीढ़ी के परम गुरु एक लेखक और चिंतक के रूप में मेरे विचार… ॥ श्री गणेशाय नमः ॥ जय श्री राम! 'राम जी के गुरुओं की दिव्य श्रृंखला' के प्रथम भाग में हमने कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ के ब्रह्मज्ञान, राजधर्म और रघुकुल की आंतरिक व्यवस्था को समझा। द्वितीय भाग में महामुनि विश्वामित्र के अस्त्र-विज्ञान, सैन्य प्रशिक्षण और राष्ट्र-निर्माण की अद्भुत दृष्टि का अध्ययन किया। तृतीय भाग में ब्रह्मर्षि अगस्त्य के वैज्ञानिक चिंतन, भू-राजनीतिक दूरदर्शिता और दक्षिण भारत में धर्म-संरक्षण की महान भूमिका को जाना। इन तीनों गुरुओं ने मिलकर श्रीराम को आदर्श राजा, महान योद्धा और मर्यादा पुरुषोत्तम बनने की दिशा प्रदान की। किन्तु... रामकथा का एक ऐसा अध्याय भी आता है... जहाँ अस्त्रों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है... जहाँ युद्ध का शोर शांत हो जाता है... जहाँ अयोध्या का राजवैभव भी मौन दिखाई देता है... और वहीं से आरम्भ होती है एक ऋषि की तपशक्ति... एक कवि की करुणा... और सत्य की ...